Prime Minister Narendra Modi initiates the historic project of reconnecting famous Kashi Vishwanath temple with Ganga

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ढाई सौ वर्षों बाद काशी विश्वनाथ धाम का मां गंगा से पुनर्मिलन हुआ-प्रधानमंत्री
डा. सुषमा दीक्षित/संपादक, क्लीन मीडिया टुडे एवं रितेश श्रीवास्तव/मुख्य संवाददाता, क्लीन मीडिया टुडे

Prime Minister Narendra Modi performing Bhumi Poojan for the Kashi Vishwanath Corridor to connect the world famous temple to the Pious river Ganga

वाराणसी, आठ मार्च:क्लीन मीडिया टुडेः लगभग ढाई सौ वर्षों बाद आज विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ धाम का उस समय मां गंगा से पुनर्मिलन हो गया एवं 41 प्राचीन पौराणिक मंदिरों का जीर्णोद्धार हुआ जब प्रधानमंत्री ने स्वयं द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक काशी विश्वनाथ मंदिर से पवित्र गंगा तक 380 करोड़ रुपये की लागत से लगभग चालीस हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में बनने वाले वाले पचास मीटर चैड़े और तीन सौ तीस मीटर लंबे रमणीक मार्ग:कारिडोरः का शिलान्यास किया।
[caption id="attachment_933" align="aligncenter" width="1113"] Prime Minister Narendra Modi performing Bhumi Poojan for the Kashi Vishwanath Corridor to connect the world famous temple to the Pious river Ganga
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इस अवसर पर आज भगवान विश्वेश्वर काशी विश्वानाथ का विधि विधान से रुद्राभिषेक करने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भूमिपूजन किया और भावविह्वल हो गये और उन्होंने कहा, ‘‘आज बाबा का सीधा गंगा से संपर्क हो गया है। यह काशी विश्वनाथ महादेव भोले बाबा का स्थान है। मेरा काशी आने का मूल कारण यहां आना था और इस पवित्र कार्य को संपन्न करना था।’’
[caption id="attachment_933" align="aligncenter" width="1113"] Prime Minister Narendra Modi performing Bhumi Poojan for the Kashi Vishwanath Corridor to connect the world famous temple to the Pious river Ganga
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प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘मंदिरों की रक्षा कैसे हो। उसकी आत्मा को बरकरार रखते हुए आधुनिक व्यवस्था हो, इसका बहुत अच्छा मिलन आज यहां दिख रहा है। यह धाम मां गंगा से भी जुड़ेगा। इससे काशी को नई पहचान मिलेगी।’’
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि ढाई सौ साल बाद मेरे ही हाथ श्री काशी विश्वनाथ धाम के विकास एवं सुन्दरीकरण के कार्य का शिलान्यास होना लिखा था। ‘‘मैं वास्तव में परम भाग्यशाली हूं।’’
[caption id="attachment_933" align="aligncenter" width="1113"] Prime Minister Narendra Modi performing Bhumi Poojan for the Kashi Vishwanath Corridor to connect the world famous temple to the Pious river Ganga
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नरेंद्र मोदी ने श्री काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण कार्य मंे हुए विलम्ब पर अपना पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि यदि पिछली सरकार का सहयोग प्राप्त हुआ होता तो आज श्री काशी विश्वनाथ धाम का शिलान्यास नहीं, उदघाटन होता।
उन्होंने कहा, ‘‘श्री काशी विश्वनाथ धाम बाबा भोले नाथ की आज मुक्ति का पर्व है। सदियों तक बाबा को सांस लेने में भी दिक्कत होती रही। श्री काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण से बाबा को मुक्ति तो मिलेगी ही, बाबा के भक्तों को शिव की विशालता की भी अनुभूति होगी।’’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को अपने ड्रीम प्रोजेक्ट श्री काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर का शिलान्यास एवं भूमि पूजन करने के बाबा भक्तांे को सम्बोधित करते हुए यह उद्गार व्यक्त किये।
उन्होंने कहा, ‘‘आज मेरा भी सौभाग्य है कि जिन सपनों को अरसे से संजोया था, वह आज पूरा हो रहा है। राजनीति में नहीं था तब भी यहां आता था। कई बार आया लेकिन नजर आता कि कुछ करना चाहिए। लेकिन पता नहीं शायद भोले बाबा ने तय किया होगा कि बेटे बातें बहुत करते हो आओ यहां करके दिखाओ। आज बाबा के आदेश से सपना साकार होने का शुभारंभ हो रहा है। काशी विश्वनाथ धाम में आज भोले बाबा के मुक्ति का पर्व है।’’
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘चारों ओर दीवारों से घिरे बाबा को सांस लेने में दिक्कत होती थी। अगल-बगल कई मकानों ने घेर रखा था। बाबा के भक्तों को अब विशालता की अनुभूति होगी।’’
उन्होंने कहा कि लगभग तीन सौ प्रापर्टी को लेकर जनता ने जिस प्रकार सहयोग दिया वह अनुकरणीय है। अपनी इस जगह को छोडकर बाबा के चरणों में समर्पित कर दी। यह काम लोगों ने किया है उनका भी सांसद के रूप में आभार और अभिनंदन करता हूं कि उन्होंने इसे अपना काम मानकर पूरा किया। कितने सदियों से यह स्थान दुश्मनों के निशाने पर रहा। कितनी बार ध्वस्त हुआ अस्तित्व विहीन करने की कोशिश की गयी। यह क्रम सदियों से चलता रहा।
उन्होंने कहा, ‘‘महात्मा गांधी जब आए तो उनके मन में भी पीड़ा रही। उन्होंने बीएचयू में भी अपनी पीड़ा व्यक्त की थी। उनकी बात को अब सौ साल होने जा रहे। अहिल्या बाई ने सदियों के बाद इसके पुनरुद्धार का बीड़ा उठाया था। तब उसे रूप मिला। अगर आप सोमनाथ जाएंगे तो सोमनाथ में भी उन्होंने बड़ी भूमिका निभाई थी। लेकिन उसको भी ढाई सौ साल बीत गए।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं हैरान हूं जब इतनी सारी इमारतों को तोड़ना शुरू किया गया तो 41 प्राचीन पौराणिक मंदिरों पर लोगों ने कब्जा कर रखा था। भोले बाबा ने चेतना जगाई। इकतालीस ऐसे ऐतिहासिक पुरातात्विक मंदिर मिले जो अजूबा लगेगा कि यह काम कैसे हो गया। लोग दबाते गए आज उन मंदिरों के मुक्ति का भी नंबर आ गया। दशकों बाद इस बार यहां पर और शानदार शिवरात्रि भी मनाई गई।
प्रधानमंत्री ने वर्ष 2014 में वाराणसी से लोकसभा चुनाव के लिये नामांकन के दौरान दिए अपने उदबोधन ‘मैं आया नहीं मुझे बुलाया है’, का जिक्र करते हुए कहा कि मुझे बुलावा ऐसे ही कामों के लिए था। मेरा संकल्प मजबूत हुआ है। यह धाम अब काशी नहीं देश से जुड़ा है।
मोदी ने कहा, ‘‘बीएचयू से आग्रह है कि केस स्टडी करें। काशी हिंदू यूनिवर्सिटी इस पर रिसर्च भी करे। ताकि दुनिया को पता चले कैसे लोगों के सहयोग से यह काम हुआ। शास्त्रों के मुताबिक कामों का पूरा पालन किया गया। ताकि आस्था पर खरांेच न आए। उन्होंने कहा कि यह नव चेतना का केंद्र बनेगा। सामाजिक चेतना का यह केंद्र बनेगा।’’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अपने जिस ड्रीम प्रोजेक्ट श्री काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर का शिलान्यास किया उसमें श्री काशी विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र के मिर्जापुर मठ की जमीन पर उन्होंने स्वयं कॉरिडोर के लिए फावड़ा चलाया और पांच विशेष शिलाओं को विधिवत पूजन के बाद स्थापित किया।
उन्होंने बताया कि आधारशिला वाली जगह पर मंदिर का भव्य प्रवेश द्वार बनाया जाएगा। लगभग चालीस हजार वर्ग मीटर क्षेत्र एवं भूखंड पर कॉरिडोर का निर्माण होगा।
प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल श्री काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार हो गई है। मंदिर के सौंदर्यीकरण और विस्तारीकरण पर 380 करोड़ रुपये खर्च होंगे। मंदिर का प्रवेश द्वार 50 फीट से ज्यादा चैड़ा बनाया जाएगा। गलियारे के दोनों तरफ श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
गौरतलब है कि माँ गंगा के पावन तट पर स्थित विश्व की प्राचीनतम नगरी काशी के हृदय में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर में आने वाले दर्शनार्थियों हेतु सुगम दर्शन की सुविधा के दृष्टिगत श्री काशी विश्वनाथ धाम की विशाल रचना की जा रही है। जो श्री काशी विश्वनाथ मंदिर को गंगा नदी से जोड़ेगा।
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ऐतिहासिक रूप से इस मंदिर का जीर्णोद्धार इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होलकर द्वारा वर्ष 1780 में कराए जाने के 239 वर्षों के उपरांत मां गंगा के आशीर्वाद से श्री काशी विश्वनाथ मंदिर की महिमा एवं वैभव को और प्रखर करने के लिए मैं काशी के सांसद एवं प्रधानमंत्री के रूप में संकल्पित होकर इस नवनिर्माण की आधारशिला रख रहा हूॅं।’’
उल्लेखनीय हैं कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा भी वर्ष 1916 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के शुभारंभ के अवसर पर दिये अपने उद्बोधन में काशी में आने वाले दर्शनार्थियों एवं श्रद्धालुओं के मंदिर दर्शन में संकीर्ण गलियों से होने वाली कठिनाई का उल्लेख किया गया था।
वर्तमान में लगभग 100 वर्षों के पश्चात मंदिर की महिमा एवं वैभव को और प्रखर करने के लिए संकल्पित होकर यह नवनिर्माण कराया जा रहा है।
परियोजना का कुल क्षेत्रफल 39310.00 वर्ग मीटर है। जिसके अंतर्गत कुल 296 आवासीय, व्यावसायिक, सेवईत, न्यास इत्यादि भवन हैं। अब तक कुल 238 भवन क्रय किए जा चुके हैं। जिनके ध्वस्तीकरण के उपरांत परियोजना के अंतर्गत लगभग 21505.92 वर्ग मीटर क्षेत्रफल उपलब्ध हुआ है। भवनों के ध्वस्तीकरण के दौरान विभिन्न भवनों के अंदर 41 अति प्राचीन मंदिर पाए गए हैं। जिनका उल्लेख वेद-पुराण व धार्मिक पुस्तकों में भी पाया गया है। प्राप्त सभी मंदिर काशी के प्राचीन धरोहर हैं।
इस योजना से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि परियोजना के अंतर्गत सभी भवनों, दुकानों इत्यादि को सहमति के आधार पर क्रय किया गया है, जिसमें निवसित 500 परिवारों को आपसी सहमति से विस्थापित किया गया है। इन भवनों को क्रय एवं रिक्त कराने के उपरांत प्राप्त सभी मंदिर प्राचीन धरोहर हैं, जो इन भवनों से आच्छादित थे। उन्हें भवनों को ध्वस्त कर मलवा निस्तारण के उपरांत जनसामान्य को दर्शन पूजन हेतु सुलभ कराया गया है। इन मंदिरों के जीर्णोद्धार एवं सुंदरीकरण का भी कार्य कराया जा रहा है। इन मंदिरों को इस परियोजना का भाग बनाकर इस क्षेत्र को एक अद्भुत संकुल का रूप दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इस परियोजना में मंदिर प्रांगण का विस्तार कर इसमें विशाल द्वार बनाए जाएंगे तथा एक मंदिर चैक का निर्माण किया जाएगा। जिसके दोनों तरफ विभिन्न भवन जैसे कि विश्रामालय, संग्रहालय, वैदिक केंद्र, वाचनालय, दर्शनार्थी सुविधा केंद्र, व्यावसायिक केंद्र, पुलिस एवं प्रशासनिक भवन, वृद्ध एवं दिव्यांग हेतु एक्सीलेटर एवं मोक्ष भवन इत्यादि निर्मित किए जाएंगे। परियोजना अंतर्गत 330.00 मीटर लम्बाई एवं 50.00 मीटर चैड़ाई एवं घाट से 30 मीटर एलिवेशन कर क्षेत्र में निर्माण कराया जाएगा।
समझा जाता है कि आने वाले समय में काशी विश्वनाथ कारिडोर के ठीक सम्मुख गंगा के दूसरे तट पर भी भगवद् प्रवेश द्वार बनाया जायेगा और वहां से काशी विश्वेश्वर तक रोप वे:लक्ष्मण झूले का निर्माण किया जायेगा जिससे बुजुर्ग एवं अशक्त भक्त सीधे भगवद् धाम में पहुंच कर उनका दर्शन पूजन कर सकेंगे।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कॉरिडोर के शिलान्यास एवं भूमि पूजन से पूर्व यहाँ पहुँचने पर सर्वप्रथम बाबा दरबार में हाजिरी लगाई एवं श्री काशी विश्वनाथ का विधि-विधान से दर्शन-पूजन व रुद्राभिषेक किया।
इस दौरान उत्त्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

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