Former PM Vajpayee ji

डॉ इंदुकांत दीक्षित

Former PM Vajpayee ji

देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई जैसा कोई दूसरा राजनेता पिछले कम से कम 4 दशकों में भारत ने नहीं देखा.

वाजपेईमें वह क्षमता थी कि वह अपने जानने वालों को या न जानने वालों को जनता को या नेताओं को सभी को मंत्रमुग्ध कर देते थे .

वाजपेईजी में ऊर्जा थी जिससे वह अपने आसपास के माहौल को चमत्कृत कर देते थे.

मुझे याद है कि एक बार उन्हें काशी हिंदू विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनाव के बाद नए पदाधिकारियों के शपथ ग्रहण समारोह में बुलाया गया और नवनिर्मित छात्र संघ भवन पर उन्होंने छात्र शक्ति को संबोधित किया.

वहां पर कार्यक्रम का संचालन कर रहे डॉ कामेश्वर उपाध्याय ने उन्हें देश का भावी प्रधानमंत्री कह कर संबोधित किया लेकिन वाजपेई जी ने बहुत स्वाभाविक प्रतिक्रिया दी तथा अपने संबोधन में कहीं से भी अपनी महानता अथवा बड़े नेता होने का जबरन एहसास लोगों को नहीं कराया. वाजपेई जी ने छात्रों को छात्रों की ही भाषा में अपना संदेश दिया और बड़े प्यार एवं सद्भाव के साथ छात्रों को संबोधित किया.

असल में वाजपेई जी वह व्यक्तित्व थे जिनमें सर्वग्राह्यता थी वाजपेई जी ऐसे राजनेता थे जिनमें एक दूर दृष्टि थी वाजपेई जी को ईश्वर ने ऐसा बनाया था जिनमें स्वत: स्फूर्त जबरदस्त नेतृत्व क्षमता थी.

वाजपेई जी का व्यक्तित्व आकर्षण से परिपूर्ण था वह जहां खड़े हो जाते थे जनता जुट जाती थी बड़ी बात तो यह थी विपक्षी भी उनका संबोधन सुनने के लिए आतुर होते थे. विपक्ष के बड़े-बड़े नेता चुनाव के समय में भी वाजपेई जी का संबोधन सुनने के लिए स्वयं उनक जनसभाओं में जाया करते थे .

कई बार तो ऐसा होता था कि एक ही समय में एक शहर में दो स्थानों पर रैली का आयोजन होने पर विपक्ष के नेता पहले स्वयं वाजपेई जी की सभा में जाते थे उनका संबोधन सुनते थे और फिर अपनी सभा में आकर अपना वक्तव्य देते थे. यह क्षमता आज देश के किसी भी राजनेता में दुर्लभ है.

हमें… युवा वर्ग को ….छात्रों को…वाजपेई जी से यह गुण सीखने की आवश्यकता है.. यह कला अपनाने की आवश्यकता है जिससे देश को वाजपेई जी जैसा नेतृत्व प्रदान किया जा सके.

यद्यपि वह महानता वह चमत्कार वह आकर्षण ईश्वर प्रदत्त गुण है जो सभी को शायद ही मिल सकता है…. हम बहुत मिस करेंगे सदा यह अभाव खटकेगा…. मन कहेगा काश वाजपेई जी अभी भी होते… काश वाजपेई जैसे नेता सार्वकालिक होते …ईश्वर कोई ऐसी व्यवस्था करता कि कभी भी देश को ऐसे नेताओं से बिछड़ना नहीं पड़ता …..

लेकिनयह प्रकृति का नियम है कि जो आया है उसे जाना है समय का चक्र है जो आगे बढ़ता जाता है और हम बस उसमें अपना किरदार निभाते चले जाते हैं….. बस ऐसे महान व्यक्तित्व के कृतित्व एवं चरित्र से सीख ले कर समाज में कुछ नया करने का प्रयास कर सकते हैं…. नमस्कार

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here